हम अगर यहाँ न होते आत तो
यह कविता जीवन की संभावनाओं और विभिन्न परिस्थितियों में अस्तित्व के विचारों पर आधारित है। कवि ताप्ती नदी से संवाद करते हुए यह सोचता है कि अगर वह यहाँ नहीं होते तो कहाँ होते। वह कल्पना करता है कि शायद वह किसी नदी के पार के गाँव में किसी पुराने कुएँ में होते, जहाँ धूप कभी-कभी आती। वह यह भी सोचता है कि वह कहीं भी होते, किसी भी तरह से साथ रह लेते। कवि यह भी सोचता है कि वह दो पत्थरों की तरह हर बारिश में घुलते और हर दोपहर गरमाते। रात में भी उनकी साँसें चलती रहतीं और अंधेरे में वह उनकी आवाज़ सुनते। अंत में, वह यह सोचता है कि क्या वह कभी-कभी किसी और तरह से होने के लिए रोते। यह कविता जीवन के विभिन्न रूपों और स्थितियों में खुद को देखने की कल्पना करती है।
| Word | Easy Meaning | Translation | Pron. |
|---|---|---|---|
| ताप्ती | नदी का नाम | भारत की एक प्रमुख नदी | taapti |
| कुएँ | जल का स्रोत | पानी निकालने की जगह | kuein |
| पीतल | धातु | पीली धातु | peetal |
| लोटे | पानी का बर्तन | पानी रखने का पात्र | lote |
| ढेलों | पत्थर | छोटे पत्थर के टुकड़े | dhelon |
| ताज्जुब | हैरानी | अचरज | taajjub |
उदय प्रकाश एक प्रसिद्ध हिंदी कवि और लेखक हैं। वे अपनी गहन और संवेदनशील कविताओं के लिए जाने जाते हैं। उनकी रचनाएँ आधुनिक जीवन के विभिन्न पहलुओं को छूती हैं।
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