मेरे तो गिरधर गोपाल
यह भजन मीराबाई की भगवान कृष्ण के प्रति असीम भक्ति और प्रेम को दर्शाता है। मीराबाई कहती हैं कि उनके लिए केवल गिरधर गोपाल ही सब कुछ हैं और उनके अलावा कोई और नहीं है। वह अपने तन, मन और धन को गिरधर गोपाल को समर्पित करती हैं और किसी और की चाह नहीं रखतीं। उनके लिए गिरधर गोपाल ही उनके पति हैं और वे उनके चरण कमलों में प्रेम करती हैं। मीराबाई का यह भजन भक्ति के उच्चतम स्तर को दर्शाता है जहाँ भक्त अपने आराध्य के प्रति पूर्ण समर्पण और प्रेम व्यक्त करता है। यह भजन भक्ति काल की विशेषताओं को दर्शाता है जहाँ भक्त और भगवान के बीच का संबंध अत्यंत व्यक्तिगत और प्रेमपूर्ण होता है।
| Word | Easy Meaning | Translation | Pron. |
|---|---|---|---|
| गिरधर | कृष्ण | कृष्ण का नाम | giridhar |
| गोपाल | कृष्ण | गायों के रक्षक | gopaal |
| मोर मुकुट | मोर पंख का मुकुट | कृष्ण का मुकुट | mor mukut |
| अर्पौं | समर्पित करूँ | देना | arpau |
| चरण कमल | पवित्र पैर | भगवान के पैर | charan kamal |
| प्रभु | भगवान | ईश्वर | prabhu |
| नागर | शहरवासी | कृष्ण के लिए | naagar |
| सहज | आसानी से | आसानी से | sahaj |
मीराबाई एक प्रसिद्ध भारतीय संत और कवयित्री थीं, जो भगवान कृष्ण की भक्त थीं। उनका जन्म 1498 में राजस्थान के मेड़ता में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन को कृष्ण भक्ति में समर्पित कर दिया और उनकी रचनाएँ भक्ति साहित्य का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
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